सड़क पर निकल करके तो देखो
धुँआ धुँआ सी हो गयी है जिंदगी !!
बहुत पुकारने पे न आई आवाज ,
क्या खुदा सी हो गयी है जिंदगी ??
भीड़ का आलम बनी वजह तो ,
एक बद्दुआ सी हो गयी है जिंदगी !!
निगाहों से मिल गयीं निगाहें तो
खुशनुमा सी हो गयी है जिंदगी !!
शाम दिखी सजी अर्थी तो लगा
शादीशुदा सी हो गयी है जिंदगी !!
मुड़ के भी देखता नहीं कोई “पंकज”
जुदा जुदा सी हो गयी है
जिंदगी !!